अब गाय के गोबर से चलेंगा 270HP वाला ये ट्रैक्टर, किसानों को होगा जबरदस्त फायदा, जानिए इसकी खासियत

New Holland2T

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अब गाय के गोबर से चलेंगा 270HP वाला ये ट्रैक्टर, किसानो को होंगी डीज़ल खर्चे पे भारी बचत भारत में गाय के गोब और मूत्र को बहुत ही महत्व दिया जाता है. पौराणिक काल से ही गाय के गोबर को पूजा में उपयोग जा रहा है. वहीं, मूत्र से कई तरह की आयुर्वेदिक दवाइयां बनाई जा रही हैं. लेकिन, आधुनिक समय में गाय के गोबर का उपयोग और भी बढ़ गया है. अब दिवाली पर गाय के गोबर से ईको फ्रेंडली दीये भी बना जा रहे हैं. साथ ही कई राज्यों में गाय के गोबर से नेचुरल पेंट भी बनाए जा रहे हैं. हालांकि, भारत में गाय के गोबर को खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. .

.लेकिन इन सभी के बीच सबसे बड़ी खबर ये है कि अब गाय के गोबर से ट्रैक्टर भी चलेंगे. गोबर का इस्तेमाल ईंधन में होता है ये तो सुना ही होगा। लेकिन एक हैरान कर देने वाली खोज हुई है। दरअसल वैज्ञानिकों ने गोबर से चलने वाला ट्रैक्टर बना दिया है।इसे ब्रिटिश कंपनी बेनामन (Bennamann) ने बनाया है। इसका नाम न्यू होलैंड टी7 (New Holland T7) रखा गया है। यह ट्रैक्टर खेती के काम के लिए शानदार साबित हो सकता है। इसे चलने के लिए डीजल की जरूरत नहीं है। यह ट्रैक्टर 270 हॉर्सपावर का है

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गोबर की खेती में वैसी काफी जरूरत होती है। फसलों के पोषण से लेकर जैविक खेती के लिए गोबर अहम होता है। ऐसे में अब गोबर से चलने वाले ट्रैक्टर आने से गोबर की अहमियत ज्यादा बढ़ जाएगी। यह ट्रैक्टर डीजल की तरह चलने वाले ट्रैक्टरों की तरह काम करता है।

जाने इस ट्रैक्टर के लिए गाय का गोबर ही क्यों इस्तेमाल (Know why only cow dung was used for this tractor)

जाने इस ट्रैक्टर के लिए गाय का गोबर ही क्यों इस्तेमाल अब सवाल यह उठता है कि इस ट्रैक्टर के लिए गाय का गोबर ही क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है। बता दें कि गाय के गोबर में फ्यूजिटिव मीथेन गैस पाई जाती है। जो बाद में बायोमीथेन ईंधन में बदल जाती है। इससे किसानों का काम आसान हो जाएगा। इसके साथ ही प्रदूषण को रोकने में भी मदद मिलेगी।

first cow-dung-powered tractor

एक्सपर्ट्स का मानना है कि गाय के गोबर से तैयार बायोमीथेन ईंधन से 270 BHP का ट्रैक्टर भी आसानी से चलाया जा सकता है। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने गाय के गोबर में पाई जाने वाली मिथेन गैस का इस्तेमाल ट्रैक्टर को चलाने में किया है। यह ठीक उसी तरह है, जिस तरह हम CNG का उपयोग कर गाड़ियां चला रहे

जाने यह कैसे काम करता है (know how it works)

जाने यह कैसे काम करता है इसे चलाने के लिए गायों के गोबर को इकट्ठा करके उसे बायोमीथेन मे बदला गया। इसके लिए ट्रैक्टर में एक क्रॉयोजेनिक टैंक भी लगाया गया है। जिसमें गोबर से तैयार हुए बायोमीथेन ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। क्रॉयोजेनिक टैंक (cryogenic tank) 162 डिग्री के तापमान में बायोमीथेन को लिक्विफाइड करता है।

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किसानो को होंगी भारी बचत (Farmers will get huge savings)

किसानो को होंगी भारी बचत इस मशीन को कोर्निश कंपनी बेनामन ने बनाया है। यह कंपनी पिछले कई दशकों से बायोमीथेन प्रोडक्ट्स के विकास और रिसर्च के काम में जुटी हुई है। इस ट्रैक्टर को टेस्ट के तौर पर कॉर्नवॉल (Cornwall) स्थति एक फॉर्म में चलाया गया। जहां सिर्फ एक साल में कार्बनडाई ऑक्साइड का उत्सर्जन 2500 टन से घटकर 500 टन पर आ गया। किसानों को यह ट्रैक्टर मिलने के बाद अतिरिक्त खर्च में कटौती आएगी।

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