Sunday, September 25, 2022
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Dairy Sector : आने वाले 2 साल में रोजगार के अवसर में बढ़ोतरी, दो लाख डेरी का होगा गठन

Dairy Sector : आने वाले 2 साल में रोजगार के अवसर में बढ़ोतरी, दो लाख डेरी का होगा गठन 2024 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ग्राम स्तर पर दो लाख नई दुग्ध सहकारी समितियों के गठन में मदद करेगी।

आने वाले दिनों में डेयरी सेक्टर में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। दरअसल, सरकार ने 2024 से पहले ग्राम स्तर पर दो लाख नई दुग्ध सहकारी समितियों (डेयरियों) के गठन की घोषणा की है। इसका जवाब देते हुए डेयरी क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार के भरपूर अवसर पैदा होंगे। नए युवा उद्यमी इस क्षेत्र में कॅरियर बना सकेंगे। साथ ही देशभर में पशुपालन करने वाले किसानों की आय में वृद्धि होगी।

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केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया ऐलान

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि भारत कुछ ही वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जिसमें सहकारिता क्षेत्र को भी अहम भूमिका निभानी होगी। ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व डेयरी सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि वर्ष 2024 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ग्राम स्तर पर दो लाख नई दुग्ध सहकारी समितियों के गठन में मदद करेगी।

उन्होंने डेयरी क्षेत्र से पेशेवर दृष्टिकोण, नवीनतम तकनीक, कम्प्यूटरीकरण और डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने का आग्रह किया और कहा कि इससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे न केवल घरेलू जरूरतें पूरी होंगी बल्कि गरीब देशों को आपूर्ति भी होगी। उन्होंने डेयरी उद्योग से दुग्ध प्रसंस्करण के लिए उपयोग की जाने वाली मशीनों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘2014 में भारत दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था लेकिन अब यह पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। मुझे विश्वास है कि अगले कुछ वर्षों में हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। उन्होंने डेयरी क्षेत्र में काम करने वाली सहकारी समितियों और कंपनियों के बीच अंतर करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका

उन्होंने कहा कि डेयरी सहकारी समितियों ने महिला सशक्तिकरण में बड़ी भूमिका निभाई है और इससे कुपोषण से लड़ने में भी मदद मिली है। उन्होंने कहा, ”सहकारिता क्षेत्र और डेयरी सहकारी समितियों ने ग्रामीण विकास में काफी काम किया है। ” उन्होंने कहा कि जैविक कृषि और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तीन बहु सहकारी समितियां भी बनाई जा रही हैं।

सरकार सहायता प्रदान करती है

सरकार डेयरी फार्मिंग के लिए भी सहायता प्रदान करती है। राज्य सरकारें अपने पशुपालकों की मदद के लिए सब्सिडी प्रदान करती हैं। आजकल बहुत से पढ़े-लिखे युवा इस काम को प्रोफेशनल तरीके से करके काफी अच्छा पैसा कमा रहे हैं। इस कारोबार की खास बात यह है कि साल भर दूध की मांग के चलते बिक्री को लेकर कोई चिंता नहीं है। मुद्रा योजना में सरकार का डेयरी कारोबार भी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिट को कुल 16 लाख रुपये की लागत से 1000 वर्ग फुट क्षेत्र में शुरू किया जा सकता है। इस क्षेत्र से शुरू होने वाली इस इकाई में प्रतिदिन 500 लीटर दूध की खपत में उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इन 16 लाख रुपये में आपको 4 लाख रुपये का निवेश करना होगा। बाकी खर्चा सरकार मुद्रा योजना के तहत कर्ज के रूप में देगी। यदि प्रतिदिन 500 लीटर दूध या सालाना 1.5 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण से उत्पादित उत्पाद की मात्रा 82 लाख रुपये तक हो सकती है।

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