Friday, September 30, 2022
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Goat Farming : आप भी करना चाहते है बकरी पालन, देखीये ये टिप्स और योजना

Goat Farming : आप भी करना चाहते है बकरी पालन, देखीये ये टिप्स और योजना बकरी पालन का व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत किया जाता है। इस बिजनेस की खास बात यह है कि इसे कम कीमत में शुरू किया जा सकता है। पशुपालन विभाग द्वारा किसानों को बकरी पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें किसानों को बकरी पालन के तरीकों और फायदों के बारे में जानकारी दी जाती है।

जानिए बकरी पालन के फायदे और इससे होने वाली आय के बारे में

इसी क्रम में हाल ही में मध्य प्रदेश में बकरी पालन को बढ़ाने के लिए पशुपालन सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें बकरी पालन के लाभ और बकरी के उपयोग पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री प्रेम सिंह पटेल ने प्रदेश के प्रचार एवं उद्यमिता विकास के लिए भोपाल में आयोजित प्रथम पशुपालन सम्मेलन को संबोधित किया। मंत्री पटेल ने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाकर पशुपालन विभाग के सहयोग से बकरी पालन करें और अच्छी आमदनी करें। उन्होंने बकरा किसानों को बैंक ऋण प्राप्त करने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने का आश्वासन दिया। प्रबंध निदेशक एमपीसीडीएफ श्री तरुण राठी एवं राज्य कुक्कुट विकास निगम एवं पशुधन श्री एचबीएस भदौरिया भी उपस्थित थे।

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बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए शुरू होगी कृत्रिम गर्भाधान योजना
अपर मुख्य सचिव पशुपालन एवं डेयरी श्री जे.एन. कॉन्सोटिया ने कहा कि बाजार में बकरी उत्पादों की मांग बढ़ रही है। प्रदेश में उच्च नस्ल के बकरी वंश को बढ़ाने के लिए चिन्हित जिलों से शीघ्र ही पूरे प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम शुरू किया जायेगा। वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन और समय पर टीकाकरण से व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। कॉन्सोटिया ने सम्मेलन में भाग लेने वाले विषय विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों और बकरी किसानों को पारंपरिक गेहूं, मक्का और गुड़ के स्थान पर बकरी का चारा तैयार करने पर विचार-मंथन करने को कहा। कॉन्सोटिया ने बताया कि पिछले साल से पोल्ट्री व्यवसाय का पंजीकरण किया जा रहा है। अब बकरी पालन का भी रजिस्ट्रेशन होगा।

बकरी पालन में मध्यप्रदेश पांचवें स्थान पर
भारतीय पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि बकरी पालन में मध्यप्रदेश देश में पांचवें और भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। उच्च नस्ल की बकरी के लिए कृत्रिम गर्भाधान बहुत जरूरी है। अच्छी नस्ल का बकरा एक से डेढ़ लाख रुपये में मिल जाता है। कृत्रिम गर्भाधान से पालक माता-पिता को फ्रोजन स्ट्रॉ से मात्र 70 रुपये में यह सुविधा उपलब्ध होगी।

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प्रदेश में बकरियों की संख्या में 38 प्रतिशत का इजाफा
निदेशक डॉ. आरके मेहिया ने कहा कि राज्य में पिछली पशु गणना की तुलना में बकरी की आबादी में 38 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि लोगों में बकरी पालन के प्रति रुझान बढ़ा है। कार्यक्रम में पं. डॉ. मुकुल आनंद पं. दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय और नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों ने भी बकरी पालन के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। धार के दीपक पाटीदार, जो पिछले 22 वर्षों से बकरी का व्यवसाय कर रहे हैं और आज एक सफल बकरी किसान बन गए हैं, देश-विदेश में कार्यरत टेलीकॉम इंजीनियर से भोपाल के श्री हेमंत माथुर ने अपनी सफलता की कहानियों को दिलचस्प तरीके से साझा किया। कार्यक्रम में प्रदेश भर के पशुपालकों के प्रश्नों का भी समाधान किया गया। उप निदेशक डॉ. अनुपम अग्रवाल ने ऑपरेशन का संचालन किया और संयुक्त निदेशक डॉ. पटेल ने आभार व्यक्त किया।

सफल बकरी पालकों ने बताए बकरी पालन के आसान तरीके
सम्मेलन में सफल बकरी पालकों ने अन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे किसानों को सफल बकरी पालन के तरीकों से अवगत कराया। इस दौरान उन्होंने बकरी पालन को लेकर जो टिप्स या तरीके बताए वो इस प्रकार हैं।

5-10 शुद्ध नस्ल की बकरियों से बकरी पालन शुरू करें और किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह लें।
बकरी पालन करने वाले किसानों को अपनी बकरियों का बीमा करवाना चाहिए ताकि संभावित नुकसान की भरपाई की जा सके।
बकरी किसान को चाहिए कि वह वजन के कारण अच्छी नस्ल की बकरी न बेचें, बल्कि इससे बकरियों की संतान बढ़ाएं।
बाजार में डिब्बाबंद मीट की मांग बढ़ रही है। इस लिहाज से बकरी पालन अब एक लाभदायक व्यवसाय बनता जा रहा है।
बकरी के दूध की भी बाजार में मांग है। साबुन, शैम्पू निर्माता इसका दूध खरीदते हैं। वहीं संक्रामक रोगों में बकरी का दूध बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए इसके दूध से भी अच्छी कमाई की जा सकती है।
बकरी पालन के बारे में अधिक जानकारी के लिए किसान http://goatwala.com/ पर जा सकते हैं।


बकरी पालन से किसान कैसे कमा सकते हैं
दूध देने वाली बकरियों को बेचकर किसान इस व्यवसाय से कमाई कर सकते हैं।
बकरियों को मांस के रूप में बेचकर भी किसान इससे धन प्राप्त कर सकते हैं।
बकरी या भेड़ की ऊन और खाल से भी आय प्राप्त की जा सकती है।
वहीं जैविक खेती के लिए बकरी की मेरिंग्यू को खाद के रूप में बेचकर भी पैसा कमाया जा सकता है।

बकरी पालन के लिए सरकार को मिलती है सब्सिडी
बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा बकरी पालन पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। इसके लिए बैंक ऋण भी उपलब्ध है। विभिन्न राज्य सरकारें बैंकों और नाबार्ड के सहयोग से बकरी पालन को बढ़ाने के लिए सब्सिडी योजनाएं प्रदान करती हैं। इसके तहत किसान ग्राहकों को अधिकतम 2.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी की सुविधा प्रदान करता है। इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ बीपीएल श्रेणी के किसानों और पशुपालकों को 33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। वहीं, ओबीसी श्रेणी के किसानों और पशुपालकों को अधिकतम 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। यह सुविधा नाबार्ड से संबद्ध वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों, शहरी बैंकों आदि द्वारा प्रदान की जाती है।

बकरी पालन के लिए आप बैंक से लोन ले सकते हैं
नाबार्ड के तहत बैंक बकरी पालन के लिए किसानों को कर्ज देते हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, केनरा बैंक आदि बैंक शामिल हैं। ये बैंक बकरी पालन के लिए 50 हजार से 50 लाख तक का कर्ज देते हैं। यदि आप 10 बकरियों के साथ बकरी पालन का व्यवसाय शुरू करते हैं तो आपको 4 लाख रुपये का ऋण मिल सकता है। इन बैंकों के अलावा नाबार्ड किसानों को कर्ज और सब्सिडी की सुविधा भी मुहैया करा रहा है। बकरी पालन के लिए कर्ज लेने वाले किसानों और पशुपालकों को सालाना 11.20 फीसदी की दर से कर्ज चुकाना है।

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