Friday, October 7, 2022
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DAP UREA PRICE:हजारो करोडो रुपये की सब्सिडी के बाद dap urea कितनी हुई सस्ती,जानिए रेट

DAP UREA PRICE:देश के 14 करोड़ किसानों को राहत देने के लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने खाद सब्सिडी बढ़ा दी है. खरीफ सीजन 2022 के लिए रिकॉर्ड 60,939 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की गई है. लेकिन, अब बहुत सारे किसानों के मन में यह सवाल है कि आखिर सरकार की इस मेहरबानी के बाद खाद का दाम (Fertilizer Price) कितना है. आपको नहीं पता है तो हम बताते हैं. हमारे यहां सब्सिडी की वजह से खाद दुनिया में सबसे सस्ती है. सरकार जानती है कि अगर रॉ मटेरियल के दाम में वृद्धि का बोझ किसानों पर डाला गया तो इससे किसानों की नाराजगी बढ़ेगी, जिसका सियासी नुकसान हो सकता है.

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मोदी सरकार ने शुरू से ही खेती-किसानी को अपने एजेंडे में काफी ऊपर रखा हुआ है. इसलिए उसने न सिर्फ एमएसपी (MSP) पर फसलों की रिकॉर्ड खरीद की है और पीएम किसान स्कीम के तहत हर किसानों को सालाना 6000 रुपये दे रही है बल्कि खाद के कच्चे माल के दाम में वृद्धि का बोझ भी कभी किसानों पर नहीं डाला. नतीजा यह है कि हर साल उसे सब्सिडी बढ़ाना पड़ रहा है.

प्रति बैग कितनी है खाद की कीमत (अप्रैल-2022)

खादरुपये/प्रति बैग दाम
यूरिया266.50
डीएपी1350
एनपीके (12.32-16-0)1470
एनपीके (10-26-26)1470
एनपीके (20-20-0-13)1470
एमओपी1700
एसएसपी400
Source: Ministry of Chemicals and Fertilizers

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इस समय कितनी है सब्सिडी

  • केंद्र सरकार खाद पर 2021-22 में 1,62,132 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है.
  • उर्वरक सब्सिडी 2013-14 में सिर्फ 71,280 करोड़ रुपये थी.
  • साल 2020-21 में डीएपी पर 10,231 रुपये प्रति टन सब्सिडी थी (512 रुपये प्रति बैग).
  • साल 2022-23 में (1-04-2022 से 30-09-2023) 50013 रुपये प्रति टन सब्सिडी (2501 रुपये प्रति बैग).
  • सरकार पूरे देश में खाद का एक ही रेट रखती है.

किसानों को कब मिलेगी डायरेक्ट सब्सिडी

इस समय सरकार यह सब्सिडी कंपनियों को देती है. कंपनियां सस्ता उर्वरक किसानों (Farmers) को उपलब्ध करवाती हैं. लेकिन अब मांग हो रही है कि कंपनियों की बजाय सब्सिडी डायरेक्ट किसानों के बैंक अकाउंट में दी जाए. ताकि खाद की खपत भी कम हो और किसानों को एहसास भी हो कि सरकार उन्हें कुछ दे रही है. डायरेक्ट किसानों के बैंक अकाउंट में सब्सिडी जाएगी तो इसका सियासी लाभ भी मिलेगा और कंपनियों द्वारा कागजों पर सब्सिडी खा जाने का खेल भी रुकेगा.

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हालांकि, तमाम किसान संगठनों की मांग के बावजूद सरकार अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. खाद कंपनियों की लॉबी ऐसा कतई नहीं होने देना चाहती. जबकि, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने भी किसानों को डायरेक्ट सब्सिडी देने की सिफारिश कर चुका है.

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