Friday, October 7, 2022
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Internatinal Update: पाकिस्तान में भी बज रहा भारतीयों का डंका,पाकिस्तान में हिंदू लड़की बनी DSP

आमतौर पर पाकिस्तानी समाज रूढ़ीवादी माना जाता है। जहां महिलाओं के लिए पढ़-लिख कर मुख्यधारा में आना मुश्किल होता है। लेकिन सिंध प्रांत की मनीषा रुपेता ने पुलिस अधिकारी (DSP) बन कर इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि मनीषा पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखती हैं।

सिंध में ही हर साल हजारों हिंदू लड़कियों का अपहरण और जबरन धर्मांतरण होता है। ऐसे में एक हिंदू लड़की का DSP बनना बड़ी बात मानी जा रही है। दुनिया भर की मीडिया ने इस खबर को तवज्जो दी है।मनीषा रुपेता पुलिस अधिकारी के रूप में महिलाओं के लिए काम करना चाहती हैं।

मनीषा रुपेता, जो पाकिस्तान की धारणा बदलना चाहती हैं

पाकिस्तान में आम धारणा है कि अच्छे घर की महिलाएं थाने और कोर्ट नहीं जाती हैं। मनीषा पाकिस्तान की इसी सोच को बदलना चाहती हैं। ‌‌BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक मनीषा ने कहा, ‘बचपन से यही बताया गया कि कौन सा पेशा महिलाओं के लिए है कौर कौन सा नहीं। इसलिए मैं पुलिस में जाकर इस धारणा को बदलना चाहती थी।’मनीषा पहले डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन बस एक नंबर से उनका एडमिशन नहीं हो पाया था। जिसके बाद उन्हें सिंध प्रांत की लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी। जिसमें उन्होंने 16वां स्थान हासिल किया।

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इसी इलाके में हर साल होता है हजारों हिंदू और सिख लड़कियों का अपहरण

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हर साल हजारों अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण के बाद जबरन निकाह करा दिया जाता है। इसमें से कुछ बच्चियों की उम्र तो केवल 10 से 12 साल ही होती है। जर्मनी की सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘डॉयचे वेले’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में हर साल एक हजार से अधिक अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण कर जबरन अधिक उम्र के मुस्लिम पुरुषों से निकाह करा दिया जाता है।

सिंध के जाकूबाबाद की रहने वाली मनीषा ने पिता की मौत के बाद भी मुश्किल हालातों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी और अब DSP बन कर इतिहास रच दिया है।

पाकिस्तान की पहली हिंदू महिला जज सुमन बेदानी को ऐसा करने की प्रेरणा उनके पापा ने दी थी।

सुमन बेदानी बनी थीं पहली हिंदू जज

साल 2019 में सिंध के ही शरदादकोट की रहने वाली सुमन बेदानी सिविल जज बनी थीं। इस मुकाम तक पहुंचने वाली सुमन पाकिस्तान की पहली हिंदू महिला थीं। सिंध यूनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई करने वाली सुमन ने जुडिशियल सेवा की परीक्षा में 54वीं रैंक हासिल की थी। जिसके बाद उन्हें जुडिशियल मजिस्ट्रेट बनाया गया था।कभी बंधुआ मजदूर का काम करने वाली कृष्णा कोहली ने सामान्य सीट से जीत दर्ज कर सीनेटर बनी थीं।

मजदूर की बेटी बनी थी सीनेटर

2018 में कृष्णा कोहली ने सीनेट के लिए पर्चा दाखिल किया था। पूर्व पाक PM बेनजीर भुट्टो की पार्टी PPP ने उन्हें सामान्य सीट से उम्मीदवार बनाया था। रेगिस्तानी इलाके थारपारकर की रहने वाली कृष्णा कोहली ने चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी। कृष्णा के पिता मजदूरी करते थे। बचपन में कृष्णा भी अपने पिता के साथ स्थानीय जमींदार की बंधुआ मजदूर थीं। अब कृष्णा सदन में पाकिस्तानी महिलाओं की आवाज हैं।

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