Friday, October 7, 2022
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खेती बाड़ी : इस वैज्ञानिक तरीके से करे हरी मिर्ची की खेती, हर दिन होगा 5000 तक का फायदा

खेती बाड़ी : हरी मिर्च की खेती के लिए सितम्बर का महिना बहुत अच्छा माना जाता है. अगर आप उत्तर प्रदेश में मिर्च की खेती करते हैं तो अगस्त के महीने में किसी अच्छे हाइब्रिड मिर्च के बीज की नर्सरी डाल देनी चाहिए. जो लगभग 35 दिन बाद रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं. तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं की हरी मिर्च की खेती कब और कैसे करें तथा अच्छी पैदावार लेने के लिए मिर्च के देखभाल कैसे करें. अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने किसान दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें।

मिर्च का हाइब्रिड बीज कौन सा है
मिर्च की खेती में अनेक तरह के रोग और कीट लगते हैं. अतः किसान भाइयों को रोगरोधी हाइब्रिड मिर्च के बीजों की खेती करनी चाहिए. जैसे- अर्का मेघना, सेमिनिस, नामधारी, पूसा, लकी इत्यादि मिर्च की हाइब्रिड प्रजातियाँ आपको मिल जाएँगी. लेकिन अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग प्रजातियाँ अनुकूल होती हैं. इसलिए किसान भाइयों को चाहिए की अपने क्षेत्र और जलवायु के अनुकूल बीजों का चयन करना चाहिए।

मिर्च की नर्सरी कब डाली जाती है
सर्दियों का मौसम मिर्च की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है. इसलिए किसानों को अगस्त के महीनों में मिर्च की नर्सरी डाल देनी चाहिए. नर्सरी में भी मिट्टी में उपस्थित कीट पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए इनसे बचने के लिए नर्सरी डालने से पहले मिट्टी में दानेदार 4G कीटनाशक मिला देना चाहिए. तथा जब पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाएँ तब नर्सरी में पानी डालना बंद कर देनी चाहिए. इससे पौधे मजबूत होते हैं और रोपाई के बाद पौधे मरते नहीं हैं।

मिर्च का पौधा कब लगाना चाहिए
सितम्बर से लेकर 15 अक्तूबर तक मिर्च का पौधा मुख्य खेत में लगाया जा सकता है. यह महिना मिर्च की खेती के लिए बहुत ही अनुकूल होता है. इस समय पौधे की रोपाई मुख्य खेतों में करने से पौधों का विकास बहुत तेजी से होता है. क्योंकि इस समय तापमान बहुत ही अच्छा होता है. कुछ किसान भाई जुलाई और अगस्त में ही पौधे खेत में लगा देते हैं. और देखा जाता है की अधिक तापमान और बारिश के कारण पौधों में गुर्चा रोग लग जाता है जिससे पौधों का विकास रूक जाता है. इसलिए किसान भाइयों को मिर्च का पौधा अनुकूल मौसम में लगाना चाहिए।

मिर्च का पौधा कितने दिन में तैयार होता है
नर्सरी में बीज बुआई के 35 दिन बाद पौधे मुख्य खेत में लगाने के लायक तैयार हो जाते हैं. तथा पौधे लगाने के 60 दिन बाद पौधे से मिर्च की तुड़ाई प्रारंभ हो जाती है. जिससे किसानों की कमाई शुरू हो जाती है. और लगभग 5 महीने तक मिर्च की तुड़ाई होती है।

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मिर्च की खेती में कौन सा खाद डालें
पौधों को स्वस्थ रखने तथा अधिक उपज लेने के लिए मिर्च की खेती में संतुलित मात्रा में खाद देना अति आवश्यक होता है. अतः खेत की अंतिम जुताई के समय मुख्य खेत में अच्छी सड़ी गोबर की खाद या मुर्गियों की खाद डालकर मिट्टी को भुरभुरी बना लेनी चाहिए. फिर पौध लगाने के 20 दिन बाद प्रति पौधा 25 ग्राम DAP पौधों के चारो और देकर खुरपी से हल्की मिट्टी लगा देनी चाहिए. इससे जड़ों का विकास बहुत अच्छा होता है.
इसके बाद पौधा लगाने के 50 दिन बाद जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएँ तब प्रति पौधा 100 ग्राम DAP और 25 ग्राम पोटाश पौधों के चारो और देकर फावड़े से मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए. और मिट्टी से पौधों को हाथ की सहायता से दबा देना चाहिए ताकि हवा से पौधे गिरने न पायें।

मिर्च की खेती में लगने वाले रोग
मिर्च की खेती में भी तमाम प्रकार के रुग और कीट लगते हैं. और यदि समय रहते इनकी निगरानी न की जाय तो बहुत नुकसान हो जाता है. तो दोस्तों चाहिए हम जानते हैं की रोग और कीटों से पौधों को बचने के लिए मिर्ची में कौन सी दवा डालना चाहिए. तथा पौधे सदा हरे-भरे रहें इसके लिए मिर्च के पौधे की देखभाल कैसे करें।

गुरचा रोग- जिस प्रकार बैगन की खेती में छोटी पत्ती रोग एक बहुत ही गंभीर बीमारी है उसी प्रकार मिर्च की खेती में गुरचा रोग बहुत ही खतरनाक बीमारी है. विभिन्न राज्यों में किसान मिर्च के इस रोग को कुकड़ा या चुरड़ा-मुरड़ा रोग के नाम से भी जानते हैं. इस रोग के प्रकोप से पत्तियां ऊपर की ओर मुड़कर गुच्छेनुमा हो जाती है. और पौधों का विकास एकदम से रूक जाता है. दरअसल यह कोई रोग या बीमारी नहीं होती है बल्कि यह सफ़ेद मक्खी, थ्रिप्स व माइट के कारण होती है।

थ्रिप्स का उपचार- थ्रिप्स बहुत ही छोटे कीट होते हैं जो पत्तियों से रस को चूसकर शक्तिहीन बना देते हैं. इनकी रोकथाम के लिए AK-57 कीटनाशक 1.5ml प्रति पम्प घोल तैयार करके छिड़काव करना चाहिए।

सफ़ेद मक्खी का उपचार- थ्रिप्स की तरह यह भी बहुत छोटे आकार के होते हैं. ये भी पौधे से कोमल पत्तियों की रस को चूसने का कम करते हैं. इनके प्रकोप से भी गुरचा रोग लगने की सम्भावना बढ़ जाती है. इससे मिर्च की फसल को बचाने के लिए इमिड़ाक्लोरोपिड 1ml प्रति 15 लिटर पानी में घोल बनाकर कड़ी फसल पर स्प्रे करना चाहिए।

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माइट के उपचार- यह लाल रंग एक बहुत छोटे कीट होते हैं जो बहुत ध्यान से देखने पर दिखाई देते हैं. ये कोमल पत्तियों और कोमल शाखाओं से रस चूसकर पौधों को कमजोर बना देते हैं. इनकी रोकथाम के लिए ओमाईट या सुपर सोनाटा 1.5 ml प्रति लिटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहये।

तना सड़न रोग- सर्दियों के मौसम में जब अधिक ठंढ पड़ती यह तथा जब कोहरा छाया रहता है तब देखने को मितला है की मिर्च की ऊपर की शाखाएँ और पत्तियां सड़ने लगती हैं. और धीरे-धीरे फलियाँ भी सड़ने लगती हैं।

उपचार- तना सड़न रोग से मिर्च की फसल को बचाने के लिए मिराडोर फफुन्दनाशक दवा का स्प्रे करना चाहिए।

मिर्च के फूल क्यों झड़ते हैं
मिर्च की खेती के लिए 10 से 35 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान बहुत अच्छा मन जाता है. अगर तापमान 10 डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे और 35 डिग्री सेंटीग्रेड के ऊपर चला जाए, तो मिर्च में फूल झड़ने लगते हैं. और अगर तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेड हो जाय तो मिर्च के पौधे में लगे फल भी गिरने लगते हैं।

Q1. मिर्च का पौधा कितने दिन में फल देता है?
ANS. 80 दिन बाद।

Q2. मिर्च की सबसे अच्छी वैरायटी कौन सी है?
ANS. अर्का मेघना, सेमिनिस, नामधारी, पूसा, लकी इत्यादि।

Q3. मिर्च के फूल क्यों झड़ते हैं?
ANS. अधिक या कम तापमान के कारण फूल गिरते हैं।

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