Friday, October 7, 2022
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क्यों इंसान ही इंसान की जान का दुश्मन है? क्या इंसानियत मर गई है? ब्लड के नाम पर चढ़ाया जा रहा है लाल पानी

खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन यानी FSDA की एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लखनऊ के ब्लड बैंकों में जो खून स्टोर किया गया है, वह ह्यूमन बॉडी के लिए फिट नहीं है। जानलेवा है।
FSDA के सहायक आयुक्त बृजेश कुमार ने बताया, ”29 जून, 30 जून और 2 जुलाई को FSDA और STF की टीम ने ब्लड बैंकों में छापेमारी की थी। लखनऊ के ब्लड बैंकों से कुल 7 सैंपल लिए गए। इन सभी सैंपलों का खून मिलावटी है।”
आइए, आपको 29 जून के दिन लेकर चलते हैं और बताते हैं कि उसके बाद क्या-क्या हुआ? खून की तस्करी का खेल चलता कैसे है? इन तस्करों का नेटवर्क कहां-कहां फैला है? और ये मिलावटी खून ह्यूमन बॉडी के लिए कितना खतरनाक हो सकता है? ये भी जानते हैं…
गहरी दाढ़ी में गिरफ्तार तस्कर टेक्नीशियन नौशाद है। उसके लेफ्ट साइड मेडलाइफ और नारायणी ब्लड बैंक के मालिक खड़े हैं।
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गहरी दाढ़ी में गिरफ्तार तस्कर टेक्नीशियन नौशाद है। उसके लेफ्ट साइड मेडलाइफ और नारायणी ब्लड बैंक के मालिक खड़े हैं।
राजस्थान से यूपी में होती है अवैध खून की सप्लाई
29 जून, दिन- बुधवार। नौशाद और असद नाम के खून तस्कर जयपुर से लखनऊ के लिए निकलते हैं। उनकी कार में अवैध खून से भरे 302 थैले थे। ये खून के थैले गत्ते के अंदर भरे हुए थे। इसी बीच मुखबिर STF के SP प्रमेश कुमार शुक्ला को ये जानकारी दे देता है। शाम तक दोनों अपने अड्डे पर पहुंच जाते हैं।
इधर, SP डिटेल्ड जानकारी जुटाकर उसी समय ठाकुरगंज के मेडलाइफ ब्लड बैंक पर छापा मारते हैं। उन्हें गत्ते में कई ऐसे खून से भरे बैग मिलते हैं, जिन पर ना ही एक्सपायरी डेट लिखी थी और ना तो डोनर का नाम। खून के कई थैलों में तो ब्लड-ग्रुप तक नहीं लिखा था। STF ने जांच को आगे बढ़ाया और एक दिन के भीतर लखनऊ समेत यूपी के 5 जिलों से 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
ब्लड बैंक 700 रुपए में खरीदते थे, फिर होती थी खून में मिलावट
पकड़े गए एक अपराधी नौशाद ने STF को बताया, “मैं जोधपुर के अंबिका ब्लड बैंक में लैब टेक्नीशियन की जॉब करता था। इसी बीच राजस्थान के कई डॉक्टरों से जान पहचान हुई। हम चैरिटेबल ब्लड बैंकों के जरिए कैंप लगाकर खून जुटाने लगे।”
नौशाद ने आगे बताया, “हम ज्यादातर खून के थैलों की इंट्री दस्तावेजों में नहीं करते थे। फर्जी डॉक्यूमेंट बनाते थे। लखनऊ के ब्लड बैंको की डिमांड पर खून के बैग्स को 700-800 रुपए की कीमत पर सप्लाई कर देते थे। लखनऊ में उस खून में मिलावट की जाती है।” 7 लोग भले ही गिरफ्तार हो चुके हों, लेकिन STF को शक है कि इनका नेटवर्क और बड़ा हो सकता है।
खून तस्कर के थैलों में डोनर का नाम, एक्सपायरी डेट और ब्लड ग्रुप भी नहीं लिखते थे।
खून तस्कर के थैलों में डोनर का नाम, एक्सपायरी डेट और ब्लड ग्रुप भी नहीं लिखते थे।
यूपी में होता है खून में से-लाइन वाटर मिलाने का खेल
STF SP प्रमेश शुक्ला ने ऑफ कैमरा बताया, “तस्करी किए गए खून के थैलों में किसी भी ब्लड बैंक का लेबल नहीं होता है और ना ही टेम्परेचर का ध्यान रखा जाता है। लखनऊ के मेड लाइफ ब्लड बैंक, नारायणी ब्लड बैंक और मानव ब्लड बैंक में खून में से-लाइन वाटर मिलकर दोगुना कर दिया जाता था।”
SP शुक्ला ने आगे कहा, “मिलावट के बाद इस खून को महंगे दामों पर लखनऊ के चैरिटेबल ब्लड बैंक, हरदोई के यूनिवर्सल ब्लड बैंक, फतेहपुर के आभा ब्लड बैंक, कानपुर के मां अंजली ब्लड बैंक, बहराइच के हसन ब्लड सेंटर और उन्नाव के सिटी चैरिटेबल ब्लड बैंक में सप्लाई कर दिया जाता था।
तस्कर नौशाद के फोन से 1150 ऐसे नंबर मिले हैं, जिनके साथ वो हमेशा कांट्रैक्ट में रहता था। अभी हमारे निशाने पर यूपी के 137 ब्लड बैंक हैं, जांच जारी है।” यूपी STF एसपी विक्रम विशाल विक्रम ने बताया, “इस तरह का अपराध करने वाले अपराधियों को उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है।”
लखनऊ के मेडलाइफ ब्लड बैंक में छापे के बाद से ही ताला पड़ा हुआ है। हालांकि इसके बगल में ही इसका ट्रामा सेंटर है जो अभी चालू है।
लखनऊ के मेडलाइफ ब्लड बैंक में छापे के बाद से ही ताला पड़ा हुआ है। हालांकि इसके बगल में ही इसका ट्रामा सेंटर है जो अभी चालू है।
एक से डेढ़ घंटे में हो जाती है मरीज की मौत
लोकबंधु अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया, “खून को बैक्टीरिया से बचाने के लिए 2 से 8 डिग्री के टेम्परेचर की जरूरत होती है। खून तस्करों को इससे कोई मतलब नहीं होता। ये तस्कर मिलावट करने के लिए ब्लड बैग की पैकिंग वाली टिप भी खोल देते हैं। पैकिंग खुलते ही बैक्टीरिया बैग के अंदर चले जाते हैं और उसे जहरीला बना देते हैं।”
डॉ. त्रिपाठी आगे कहते हैं, “खून का अवैध धंधा करने वाले खून में से-लाइन वाटर मिलाते हैं। इस तरह का खून मरीज के लिए बेहद खतरनाक होता है। इससे मरीज के शरीर में इन्फेक्शन फैल जाता है। 75% मरीज तो एक से डेढ़ घंटे के अंदर हार्ट फेल होने की वजह से दम तोड़ देते हैं।”
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साल 2018 से यूपी में खून तस्करी के 3 बड़े मामले
26 अक्टूबर, 2018 को यूपी STF ने मोहम्मद नसीम और उसके 4 साथियों को गिरफ्तार किया था। ये लोग रिक्शा चालकों और नशे की लत के शिकार लोगों को 1 हजार रुपए देकर उनका एक यूनिट ब्लड निकालते थे। फिर खून में से-लाइन वाटर मिलाकर उसे 3 से 4 हजार रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बेचते थे।
6 जुलाई, 2020 को चंदौली से भी मिलावटी खून का कारोबार करने वाले 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस गिरोह का मास्टरमाइंड डॉ. केपी सिंह था। गरीबों से ब्लड खरीद कर बिना जांच के मरीजों को चढ़ा देते थे। ये गिरोह बिहार के मोहनिया के नारायण नर्सिंग होम को भी खून सप्लाई करता था। गिरोह के सदस्य हॉस्पिटल में जरूरतमंद को तलाशते थे और उसे महंगे दामों पर खून बेचते थे।
17 सितंबर, 2021 को यूपी STF ने मेडिकल कॉलेज के एक असिस्टेंट प्रोफेसर और एमबीबीएस डॉ. अभय प्रताप और उसके 2 साथियों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से 100 यूनिट ब्लड भी बरामद किया था। ये लोग राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बिहार, एमपी और यूपी तक में शिविर लगाकर लोगों से खून दान करवाते थे। फिर उसमें मिलावट कर उसे दोगुना करने के बाद बेचते थे।
26 अक्टूबर, 2018 को जो 5 लोग गिरफ्तार हुए थे। वो इसी डॉ. अभय की गैंग के ही सदस्य थे। पूछताछ में पता चला था कि इनके हर जिले में एक दो एजेंट हैं।
26 अक्टूबर, 2018 को जो 5 लोग गिरफ्तार हुए थे। वो इसी डॉ. अभय की गैंग के ही सदस्य थे। पूछताछ में पता चला था कि इनके हर जिले में एक दो एजेंट हैं।
यूपी में 629 ब्लड बैंक हैं, चैरिटेबल ट्रस्ट के 81 बैंक रडार पर
STF के ADG अमिताभ यश ने कहा, “जांच लगातार जारी है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक यूपी के चैरिटेबल ब्लड बैंक की क्वालिटी पर भरोसा करना ठीक नहीं।” यूपी में सरकारी, गैर सरकारी और चैरिटेबल ब्लड बैंकों की संख्या 629 है। जिसमें 81 चैरिटेबल ब्लड बैंक है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में 109 सरकारी ब्लड बैंक, 174 प्राइवेट ब्लड बैंक, 81 चैरिटेबल ब्लड बैंक, 12 स्टैंड एलॉन ब्लड बैंक, 48 सरकारी ब्लड सेपरेटर यूनिट हैं। इन ब्लड बैंक्स में लोग खून डोनेट करते हैं

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