Saturday, October 8, 2022
Homeधर्म विशेषMahalaya Amavasya 2022 : पितृ पक्ष का समापन होगा महालया अमावस्‍या, जानिये...

Mahalaya Amavasya 2022 : पितृ पक्ष का समापन होगा महालया अमावस्‍या, जानिये  पितरों के लिए श्राद्ध, पिंड दान, तर्पण आदि कैसे करे

Mahalaya Amavasya 2022 : पितृ पक्ष का समापन होगा महालया अमावस्‍या, जानिये  पितरों के लिए श्राद्ध, पिंड दान, तर्पण आदि कैसे करे पितृ पक्ष 2022 प्रारंभ तिथि और समाप्ति समय पितृ पक्ष के 15 दिन शुरू हो गए हैं। 25 सितंबर 2022 को महालय अमावस्या के दिन श्राद्ध समाप्त होगा।

पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए : हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। इस दौरान पितरों का श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण आदि किया जाता है। पितृ पक्ष महालय अमावस्या के दिन समाप्त होता है। इसे सर्व पितृ अमावस्या भी कहते हैं। इस साल 25 सितंबर 2022 को महालय अमावस्या रविवार को है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान, पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और विभिन्न रूपों में भोजन और पानी लेते हैं। इसलिए इन 15 दिनों में गाय, कुत्ते, कौवे, चीटियों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को सम्मानपूर्वक भोजन कराना चाहिए।

यह भी पढ़े :  भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह का ये फोटोशूट देख हो जाओगे हैरान, देखे फोटोज

महालय अमावस्या 2022 पर करें श्राद्ध-तर्पण
हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन मास की अमावस्या तिथि यानी महालय अमावस्या तिथि 25 सितंबर 2022 को प्रातः 03:12 बजे से प्रारंभ होकर 26 सितंबर 2022 को प्रातः 03:23 बजे समाप्त होगी। इस दिन पितरों को जिनकी तिथि मृत्यु का पता नहीं चलता, उनका श्राद्ध-तर्पण आदि किया जाता है। इसके अलावा पितृ पक्ष का अंतिम दिन होने के कारण इस दिन पितरों के लिए बताए गए अनुष्ठान पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ करना चाहिए।

यह भी पढ़े : राम मंदिर का 40 फीसदी काम हो गया पूरा,जानिए कब कर पाओगे रामलला के दर्शन

महालय या सर्व पितृ अमावस्या का महत्व
हिंदू धर्म में सभी अमावस्या तिथियों को पितरों के भोग के लिए बेहद खास माना जाता है। इसमें पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि विशेष है। इसे महालय या सर्व पितृ अमावस्या कहते हैं। इस दिन श्राद्ध या पितृ पक्ष समाप्त होता है। इस दिन पूर्वज अपने लोगों के पास लौट जाते हैं। इसलिए जाते समय उन्हें पूरे सम्मान के साथ भोजन और पानी देना चाहिए। पितरों को प्रसन्न करने के लिए महालय अमावस्या के दिन श्राद्ध करें। पितरों की पसंद के व्यंजन बनाकर गाय, कुत्ते, कौवे को याद करते हुए उन्हें खिलाएं। इसके अलावा ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं। ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। साथ ही ब्राह्मणों को दान और दक्षिणा दें। गरीबों को भी दान करें। इसी के साथ पितरों के आशीर्वाद से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है।

बहुचर्चित खबरें