Saturday, October 8, 2022
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मक्का की इन किस्मो से होगी अधिक उपज,किसानो को जमकर मिलेगा मुनाफा

Corn varieties :- मक्का की इन किस्मो से होगी अधिक उपज किसानो को जमकर मिलेगा मुनाफा।

Makka Ki In Variety Se Hoga Jyada Munafa :- खरीफ मौसम की प्रमुख फसलों के बाद मक्का का महत्वपूर्ण स्थान है। मक्का की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इसके उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों ने कम पानी में अधिक उपज देने वाली किस्में विकसित की हैं।

मक्का की प्रमुख किस्मे

पूसा एचएम 8 (हाइब्रिड) Pusa HM 8 (Hybrid)
मक्का की यह किस्म खरीफ सिंचित क्षेत्रों के लिए वर्ष 2017 में अधिसूचित की गई है। यह किस्म 95 दिनों में पक जाती है। मक्के की इस किस्म को आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के लिए मंजूरी दी गई है। मक्के की यह किस्म प्रोटीन से भी भरपूर होती है। पूसा एचएम 8 उन्नत किस्म का औसत उत्पादन 62.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और अपेक्षित उपज 92.6 क्विंटल है।
पूसा एचएम 9 (हाइब्रिड) Pusa HM 9 (Hybrid)
खरीफ मौसम और सिंचित क्षेत्रों के लिए वर्ष 2017 में पूसा एचएम 9 मक्का की उन्नत किस्म अधिसूचित की गई है। इसकी खेती उत्तर पूर्वी मैदानी इलाकों में की जा सकती है। यह किस्म 89 दिनों में पक जाती है। यह किस्म प्रोटीन से भरपूर होती है। इस किस्म का औसत उत्पादन 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है जबकि संभावित उपज 74.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। मक्का की इस किस्म को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश राज्यों के लिए अनुमोदित किया गया है।
पूसा सुपर स्वीट कॉर्न-1 (हाइब्रिड) Pusa Super Sweet Corn-1 (Hybrid) खरीफ मौसम और सिंचित क्षेत्र के लिए वर्ष 2018 में मक्के की पूसा सुपर स्वीट कॉर्न-1 किस्म अधिसूचित की गई है। मक्का की यह किस्म 74 से 81 दिनों में पक जाती है। मक्का की इस किस्म की उपज एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होती है। इसकी औसत उपज उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में 98.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में 97 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, उत्तर-पूर्वी मैदानों में 75.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में 101 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। वहीं इस किस्म के मक्का की संभावित उपज उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र के लिए 126.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों के लिए 118.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, उत्तर-पूर्वी मैदानों के लिए 105.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और 111.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। प्रायद्वीपीय क्षेत्र के लिए।
पूसा सुपर स्वीट कॉर्न-2 Pusa Super Sweet Corn-2
मक्का की इस किस्म को खरीफ सिंचित क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इसकी खेती उत्तर और दक्षिण भारत में की जा सकती है। यह किस्म 77 दिनों में पक जाती है। इस किस्म की औसत उत्पादन क्षमता 95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है जबकि संभावित उपज 102 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। मक्का की इस किस्म का उपयोग हरे चारे और हरे मकई के लिए किया जाता है। हरी मक्का की औसत उपज 128 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि हरे चारे के रूप में 183 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त की जा सकती है। मक्के की इस किस्म को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के लिए मंजूरी दी गई है।
पूसा जवाहर संकर मक्का-1 (संकर) Pusa Jawahar Hybrid Maize-1 (Hybrid)
मक्का की इस किस्म को वर्ष 2019 में अधिसूचित किया गया है, जिसे खरीफ मौसम और सिंचित क्षेत्र के लिए विकसित किया गया है। यह किस्म 95 दिनों में पक जाती है। वहीं, यह एक प्रकार का प्रोटीन युक्त मक्का है। मक्का की इस किस्म का औसत उत्पादन 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है जबकि संभावित उपज 103 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। मक्के की यह किस्म मध्य प्रदेश के लिए उपयुक्त है।
मक्का की किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें कीटों और बीमारियों का खतरा कम होता है। चूंकि खरीफ सीजन शुरू होने वाला है और मक्का की बुवाई भी इसी सीजन में की जाती है। ऐसे में किसान मक्का की उन्नत किस्मों को चुनकर कम लागत में अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं।

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