Sunday, September 25, 2022
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Technology : आर्टिफिशियल हार्ट से बचाई किसान की जान, केवल 5% ही काम कर रहा था हार्ट

Technology: हार्ट फेल से जूझ रहे 5 बच्चों के पिता को टेम्परेरी अर्टिफिशियल हार्ट ने नया जीवन दिया है। मरीज का हार्ट केवल 5 प्रतिशत ही काम रहा था, यह सबसे कमजोर केस में से एक माना जा रहा है। इसमें किसान मरीज के जिंदा रहने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई थी। इस प्रोसेस को ‘एशिया-पेसेफिक’ इंटरनेशनल कांफ्रेंस में लाइव दिखाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें सबसे उन्नत लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस “इम्पेला’ का उपयोग कर उनकी जान बचाई। खास बात यह कि इस टेक्नोलॉजी का सेंट्रल इंडिया में पहली बार उपयोग हुआ है। मरीज को ट्रीटमेंट के चौथे ही दिन डिस्चार्ज कर दिया।

मामला शुजालपुर के 50 वर्षीय किसान अर्जुन का है। वे पहले से ही डायबिटिक पेशेंट हैं। उन्हें पहले भी दो बार हार्ट अटैक आ चुका था। जिसके कारण उनका हार्ट कमजोर हो गया था। 25 जुलाई को उन्हें फिर सीने में दर्द होना शुरू हुआ। इस पर वे अपनी एक हफ्ते पुरानी इकोकार्डियोग्राफी और एंजियोग्राफी की रिपोर्ट्स लेकर एक प्राइवेट अस्पताल में दिखाने पहुंचे। डॉक्टरों ने उनकी सारी रिपोर्टस देखी और चेकअप किया। यहां डॉ के. रोशन राव और डॉ. सरिता राव की टीम ने डायग्नोस किया कि उनके उनके पास ज्यादा समय नहीं है क्योंकि हार्ट में तीन ब्लॉकेज थे। इसके साथ ही उनका हार्ट पंपिंग सिर्फ 5% काम करने के कारण समय तेजी से खत्म हो रहा था। टीम ने हार्ट ट्रांसप्लांट सहित अन्य कई विकल्पों के बारे में सोचा लेकिन पेशेंट की स्थिति और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उपलब्ध सभी विकल्प उनके लिए ठीक नहीं थे।

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पेशेंट अर्जुन के साथ डॉक्टरों की टीम।

रक्त वाहिका से डालते हैं इम्पेला, यह बांयी ओर से रक्त पंप करता है

पेशेंट की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने “लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस’ लगाने का फैसला लिया। यह एक मैकेनिकल दिल होता है जिसे ‘इम्पेला’ भी कहा जाता है। इस सिस्टम में एक पतली, लचीली ट्यूब (कैथेटर) के अंत में एक छोटा रक्त पंप होता है। यह आमतौर पर रोगी के कमर में रक्त वाहिका के माध्यम से डाला जाता है। एक बार प्रत्यारोपित होने के बाद, यह दिल की बायीं ओर से शरीर के विभिन्न भागों में रक्त पंप करता है।

जानिए कैसे काम करता है इम्पेला

इस प्रोसेस में ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है कि बांया वेंट्रिकल हार्ट के कक्षों में सबसे मोटा है और पूरे शरीर में टिश्यू को ऑक्सीजनयुक्त रक्त पंप करता है इसलिए हार्ट फेल होने की स्थिति में इसे ठीक रखना जरुरी होता है। इसके प्रत्यारोपित होने पर उपकरण शरीर के बाहर एक्सटर्नल कंसोल से जुड़ा होता है और बांए वेंट्रिकल को दिल के कुछ काम करके आराम करने में मदद करता है। इससे पेशेंट का दिल बेहतर तरीके से काम कर पाता है और डॉक्टरों को एंजियोप्लास्टी, स्टेंट प्लेसमेंट आदि जैसे जरूरी इलाज करने में मदद मिलती है।

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दुनिया का सबसे छोटा मेडिकल डिवाइस

इम्पेला दुनिया का सबसे उन्नत लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस है और चुंबकीय क्षेत्र के आधार पर काम करता है। इससे खून का थक्का जमना लगभग बंद हो जाता है, जिससे स्ट्रोक की आशंका कम हो जाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें मरीज के पैरामीटर्स को जल्दी से अडॉप्ट करने की क्षमता होती है। मरीज का इलाज कर रहीं सीनियर इंटरवेंशन कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सरिता राव ने बताया कि हार्ट फेल के पेशेंट का हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं किया जा सकता है। इसमें गंभीर पेशेंट को और जिनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं है, इस प्रोसेस से राहत पा सकते हैं। मामले में पेशेंट के परिजन की सहमति के बाद इम्पेला प्रोसेस से उनके ब्लॉकेज निकाले गए और अब पेशेंट की हालत ठीक है।

मेरी उम्मीदें खत्म हो चुकी थी, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है

पेशेंट अर्जुन के परिवार में पत्नी व पांच बच्चे हैं। उन्हें चौथे दिन डिस्चार्ज किया गया। उन्होंने बताया मेरी बचने की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी थी। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है क्योंकि मैं कई डॉक्टरों से मिल चुका था। हर जगह से मुझे निराश होकर ही लौटना पड़ा था।

एशियापैसिफिक वर्कशॉप में लाइव दिखाया

डॉ के. रोशन राव बताया कि जब पेशेंट ने हमसे संपर्क किया तो उन्होंने पहले जो भी इलाज करवाया था उसके बावजूद हमने उनकी मदद करने के बारे में सोचा। हमने उन्हें टेम्पररी आर्टिफिशियल हार्ट “इम्पेला’ के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया कि हम टेम्पररी ऑर्टिफिशियल हार्ट की मदद से उनकी एंजियोप्लास्टी करेंगे और वे इसके लिए राजी हो गए। सेंट्रल इंडिया में पहली बार हुई प्रोसेस को हैदराबाद में आयोजित एशिया-पैसिफिक वर्कशॉप में लाइव दिखाया गया। डॉ. अशोक वाजपेयी (हॉस्पिटल डायरेक्टर व सीनियर कंसलटेंट) ने कहा कि उन्नत लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस का उपयोग लोगों का जीवन बचाने की एक नई शुरुआत है। टीम में डॉ. विकास गुप्ता (सीनियर कार्डिएक एनेस्थेटिस्ट), डॉ क्षितिज दुबे (सीनियर कार्डियक सर्जन) आदि शामिल थे।

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जानिए और क्या है खास इसमें

– 2018 में भारत में यह मेडिकल टेक्नोलॉजी लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (इम्पेला) आई। – चार सालों में इस प्रोसेस के जरिए करीब सौ लोगों की जान बचाई जा चुकी लेकिन इनमें हार्ट के सिर्फ 5% के काम करने (सबसे कमजोर केस) का यह पहला मामला है।

– इसमें पेशेंट को इलाज का खर्च 18.50 लाख रुपए आया है।

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